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सोमवार, 26 अगस्त 2019

मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, वह किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है?


मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, वह किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है?


परमेश्वर का कार्य निरंतर आगे बढ़ता रहता है, और यद्यपि उसके कार्य का प्रयोजन नहीं बदलता है, जिन तरीकों से वह कार्य करता है वे निरंतर बदलते रहते हैं, जिसके फलस्वरूप वे लोग भी बदलते रहते हैं जो उसका अनुसरण करते हैं। जितना अधिक परमेश्वर का कार्य होगा, उतना ही अधिक मनुष्य परमेश्वर को जानेगा, और मनुष्य का स्वभाव भी परमेश्वर के कार्य के साथ बदलेगा। हालाँकि, परमेश्वर का कार्य इस कारण से हमेशा बदलता रहता है कि पवित्र आत्मा के कार्य के बारे में नहीं जानने वाले और सत्य को न जानने वाले विवेकहीन लोग परमेश्वर के विरोधी बन जाते हैं। कभी भी परमेश्वर का कार्य मनुष्यों की धारणाओं के अनुरूप नहीं होता है, क्योंकि उसका कार्य हमेशा नया होता है और कभी भी पुराना नहीं होता है। न ही वह कभी पुराने कार्य को दोहराता है बल्कि पहले कभी नहीं किए गए कार्य के साथ आगे बढ़ जाता है।

सोमवार, 22 जुलाई 2019

तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई

6000 वर्षों के दौरान कार्य की समग्रता समय के साथ धीरे-धीरे बदल गई है। इस कार्य में बदलाव समस्त संसार की परिस्थितियों के अनुसार हुए हैं।


तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई


6000 वर्षों के दौरान कार्य की समग्रता समय के साथ धीरे-धीरे बदल गई है। इस कार्य में बदलाव समस्त संसार की परिस्थितियों के अनुसार हुए हैं। परमेश्वर का प्रबंधन का कार्य केवल मानवजाति के पूर्णरूपेण विकास की प्रवृत्ति के अनुसार धीरे-धीरे रूपान्तरित हुआ है; सृष्टि के आरंभ में इसकी पहले से योजना नहीं बनाई गई थी। संसार का सृजन करने से पहले, या इसके सृजन के ठीक बाद, यहोवा ने अभी तक कार्य के प्रथम चरण, व्यवस्था की; कार्य के दूसरे चरण—अनुग्रह की; और कार्य के तीसरे चरण—जीतने की योजना नहीं बनायी थी, जिनमें वह सबसे पहले लोगों के एक समूह—मोआब के कुछ वंशजों के बीच कार्य करता, और इसके माध्यम से वह समस्त ब्रह्माण्ड को जीतता।

सोमवार, 8 जुलाई 2019

स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है


स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है


देहधारी परमेश्वर मसीह कहलाता है, तथा मसीह परमेश्वर के आत्मा के द्वारा धारण किया गया देह है। यह देह किसी भी मनुष्य की देह से भिन्न है। यह भिन्नता इसलिए है क्योंकि मसीह मांस तथा खून से बना हुआ नहीं है बल्कि आत्मा का देहधारण है। उसके पास सामान्य मानवता तथा पूर्ण परमेश्वरत्व दोनों हैं। उसकी दिव्यता किसी भी मनुष्य द्वारा धारण नहीं की जाती है। उसकी सामान्य मानवता देह में उसकी समस्त सामान्य गतिविधियों को बनाए रखती है, जबकि दिव्यता स्वयं परमेश्वर के कार्य करती है। चाहे यह उसकी मानवता हो या दिव्यता, दोनों स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति समर्पित हैं।

रविवार, 16 जून 2019

राज्य का युग वचन का युग है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर-अंतिम दिनों के मसीह के कथन-राज्य के युग में, परमेश्वर नए युग की शुरूआत करने, अपने कार्य के साधन बदलने और संपूर्ण युग के लिये काम करने की ख़ातिर अपने वचन का उपयोग करता है।

राज्य का युग वचन का युग है


       राज्य के युग में, परमेश्वर नए युग की शुरूआत करने, अपने कार्य के साधन बदलने और संपूर्ण युग के लिये काम करने की ख़ातिर अपने वचन का उपयोग करता है। वचन के युग में यही वह सिद्धांत है जिसके द्वारा परमेश्वर कार्य करता है। वह देहधारी हुआ ताकि विभिन्न दृष्टिकोणों से बातचीत कर सके, मनुष्य वास्तव में परमेश्वर को देख सके, जो देह में प्रकट होने वाला वचन है, उसकी बुद्धि और चमत्कार को जान सके। उसने यह कार्य इसलिए किये ताकि वह मनुष्यों को जीतने, उन्हें पूर्ण बनाने और ख़त्म करने के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से हासिल कर सके। वचन के युग में वचन को उपयोग करने का यही वास्तविक अर्थ है। वचन के द्वारा परमेश्वर के कार्यों को, परमेश्वर के स्वभाव को मनुष्य के सार और इस राज्य में प्रवेश करने के लिए मनुष्य को क्या करना चाहिए, यह जाना जा सकता है।

गुरुवार, 13 जून 2019

परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य

अंतिम दिनों के मसीह के कथन-परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य : पवित्र आत्मा के कार्य को कई प्रकार के लोगों और अनेक भिन्न-भिन्न परिस्थितियों के माध्यम से सम्पन्न और पूरा किया जाता है।

परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य


मनुष्य के कार्य में कितना कार्य पवित्र आत्मा का कार्य है और कितना मनुष्य का अनुभव है? यहाँ तक कि अब भी, ऐसा कहा जा सकता है कि लोग अब तक इन प्रश्नों को नहीं समझते हैं, यह सब इसलिए है क्योंकि लोग पवित्र आत्मा के कार्य करने के सिद्धान्तों को नहीं समझते हैं। मनुष्य का कार्य जिसके बारे में मैं बात करता हूँ, निस्संदेह, वह उन लोगों के कार्य की ओर संकेत कर रहा है जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है या जिन्हें पवित्र आत्मा के द्वारा उपयोग किया जाता है। मैं उस कार्य की ओर संकेत नहीं कर रहा हूँ जो मनुष्य की इच्छा से उत्पन्न होता है किन्तु पवित्र आत्मा के कार्य के दायरे के भीतर प्रेरितों, कार्यकर्ताओं या साधारण भाईयों और बहनों के कार्यों की ओर संकेत कर रहा हूँ। यहाँ, मनुष्य का कार्य देहधारी परमेश्वर के कार्य की ओर संकेत नहीं करता हैं बल्कि लोगों के ऊपर पवित्र आत्मा के कार्य के दायरे और सिद्धान्तों की ओर संकेत करता है।

शुक्रवार, 7 जून 2019

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा


तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा


क्या तुम यीशु को देखना चाहते हो? क्या तुम यीशु के साथ रहना चाहते हो? क्या तुम यीशु के द्धारा कहे गए वचनों को सुनना चाहते हो? यदि ऐसा है, तो तुम यीशु के लौटने का कैसे स्वागत करेंगे? क्या तुम पूरी तरह से तैयार हो? किस ढंग से तुम यीशु के लौटने का स्वागत करेंगे? मुझे लगता है कि प्रत्येक भाई और बहन जो यीशु का अनुसरण करतें हो यीशु का अच्छी तरह से स्वागत करना चाहेंगे। परन्तु क्या तुम लोगों ने विचार किया है कि जब यीशु वापस आएगा तो क्या तुम सचमुच में उसे पहचान लेंगे? क्या तुम लोग सचमुच में वह सब कुछ समझ जाएँगे जो वह कहेगा? क्या तुम लोग वे सब कार्य जो यीशु करेगा, उन्हें, बिना किसी शर्त के, सचमुच में स्वीकार कर लेंगे? वे सब जिन्होंने बाइबल पढ़ी है, यीशु के लौटने के बारे में जानते हो, और वे सब जिन्होंने बाइबल को अभिप्राय से पढ़ी है, उसके आगमन की प्रतीक्षा करते हो।

शुक्रवार, 24 मई 2019

जो नये काम को स्वीकारते हैं वो धन्य हैं

भजन के आॅडियो, पवित्र आत्मा, परमेश्वर, परमेश्वर का कार्य, आशीषें



जो नये काम को स्वीकारते हैं वो धन्य हैं


I
धन्य हैं जो नए कार्य को करते हैं स्वीकार।
धन्य हैं जो नए कार्य को करते हैं स्वीकार।
धन्य हैं वो सब जो करते हैं पालन, पवित्र आत्मा के आज के कथनों का।
नहीं फ़र्क पड़ता कि वे कैसे हुआ करते थे,
या पवित्र आत्मा उनमें कैसे काम किया करता था--
धन्य हैं वे ज़्यादा सबसे, जिन्होंने पा लिया है नवीनतम कार्य।
आह ... आह ...
धन्य हैं वे ज़्यादा सबसे, जिन्होंने पा लिया है नवीनतम कार्य,
और जो नाकाम हैं नवीनतम कार्य का, पालन कर पाने में, हटा दिए गए हैं।
II
परमेश्वर चाहता है उन्हें, जो कर पाते हैं नई रोशनी को स्वीकार,
और चाहता है उन्हें, जो करते हैं नवीनतम कार्य को स्वीकार।
वो कर पाते हैं खोज पवित्र आत्मा के काम की
और समझ पाते हैं नई चीज़ों को,
और कर पाते हैं दरकिनार पुरानी धारणा को,
और करते हैं पालन आज, परमेश्वर के काम का।

बुधवार, 22 मई 2019

परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे

अंतिम दिनों के मसीह के कथन, प्रार्थना, यीशु, मसीह, पवित्र आत्मा

परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे

आरंभ में परमेश्वर विश्राम कर रहा था। उस समय पृथ्वी पर कोई मनुष्य या अन्य कुछ भी नहीं था, और परमेश्वर ने किसी भी तरह का कोई कार्य नहीं किया था। परमेश्वर ने अपने प्रबंधन के कार्य को केवल तब आरंभ किया जब एक बार मानवजाति अस्तित्व में आ गई और एक बार जब मानव जाति भ्रष्ट कर दी गई। इसके बाद से, परमेश्वर ने अब और विश्राम नहीं किया बल्कि इसके बजाय उसने स्वयं को मनुष्यजाति के बीच व्यस्त रखना आरंभ कर लिया। यह मनुष्यों की भ्रष्टता की वजह से था कि परमेश्वर को उसके विश्राम से उठा दिया गया, और यह प्रधान स्वर्गदूत के विद्रोह के कारण भी था कि जिसने परमेश्वर को उसके विश्राम से उठा दिया। यदि परमेश्वर शैतान को परास्त नहीं करता और मानव जाति को नहीं बचाता है, जो की भ्रष्ट हो चुकी है, तो परमेश्वर पुनः कभी भी विश्राम में प्रवेश नहीं कर पाएगा। जैसे मनुष्य में विश्राम का अभाव है, वैसे ही परमेश्वर में भी है।

रविवार, 12 मई 2019

प्रस्तावना

अंतिम दिनों के मसीह के कथन, परमेश्वर, परमेश्वर का वचन, पवित्र आत्मा


प्रस्तावना

यद्यपि बहुत से लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, किंतु बहुत कम लोग समझते हैं कि परमेश्वर पर विश्वास करने का अर्थ क्या है, और परमेश्वर के मन के अनुरूप बनने के लिये उन्हें क्या करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि यद्यपि लोग "परमेश्वर" शब्द और "परमेश्वर का कार्य" जैसे वाक्यांश से परिचित हैं, किंतु वे परमेश्वर को नहीं जानते हैं, और उससे भी कम वे उसके कार्य को जानते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि तब वे सभी जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं, वे दुविधायुक्त विश्वास रखते हैं। लोग परमेश्वर पर विश्वास करने को गंभीरता से नहीं लेते हैं, क्योंकि परमेश्वर पर विश्वास करना उनके लिये अत्यधिक अनजाना और अजीब है। इस प्रकार, वे परमेश्वर की अपेक्षा पर खरे नहीं उतरते हैं।

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है"


सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है" 

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "परमेश्वर न केवल पवित्रात्मा, वह आत्मा, सात गुना तीव्र पवित्रात्मा, सर्व-व्यापी पवित्रात्मा है, बल्कि एक व्यक्ति, एक साधारण व्यक्ति, अपवादात्मक रूप से एक सामान्य व्यक्ति भी है। वह न सिर्फ़ नर, बल्कि नारी भी है। वे इस बात में एक समान हैं कि वे दोनों ही मानवों से जन्मे हैं, और इस बात पर असमान हैं कि एक का पवित्र आत्मा के द्वारा गर्भधारण किया गया है और दूसरा, मानव से जन्मा है, परन्तु प्रत्यक्ष रूप से पवित्रात्मा से ही उत्पन्न है।

सोमवार, 30 जुलाई 2018

परमेश्वर के कथन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (भाग एक)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (भाग एक)  

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "कार्य के तीनों चरण परमेश्वर के प्रबंधन का मुख्य केन्द्र हैं और उनमें परमेश्वर का स्वभाव और वह क्या है व्यक्त होते हैं। जो परमेश्वर के कार्य के तीनों चरणों के बारे में नहीं जानते हैं वे यह जानने में अक्षम हैं कि परमेश्वर कैसे अपने स्वभाव को व्यक्त करता है, न ही वे परमेश्वर के कार्य की बुद्धि को जानते हैं, और वे उन कई मार्गों जिनके माध्यम से वह मानवजाति को बचाता है, और सम्पूर्ण मानवजाति के लिए उसकी इच्छा से अनभिज्ञ रहता है।

बुधवार, 6 जून 2018

"बदलाव की घड़ी" | How to Be Raptured Into the Kingdom of Heaven


"बदलाव की घड़ी" | How to Be Raptured Into the Kingdom of Heaven (Hindi Dubbed)

सू मिंग्यू मुख्य-भूमि चीन में एक गृह कलीसिया में उपदेशिका हैं। वर्षों से वे प्रभु की धर्मनिष्ठ सेविका रही हैं, जो प्रभु के लिए उपदेश देने का कार्य करती हैं और कलीसिया के कार्य का भार उठाने पर ज़ोर देती हैं। वे बाइबल में पौलुस के कथन पर चलती हैं, यह समझते हुए कि केवल प्रभु में विश्वास कर लेने मात्र से धार्मिक कहलाया जा सकता है और अनुग्रह द्वारा रक्षा मिल सकती है। हालांकि मनुष्य अब भी निरंतर पाप करता है, परंतु उसके पाप प्रभु द्वारा क्षमा किये जा चुके हैं, और प्रभु के लौटने पर उसकी छवि उसी पल बदल कर पवित्र कर दी जायेगी उसे स्वर्ग के राज्य में आरोहित कर लिया जाएगा। परंतु, हाल के वर्षों में कलीसिया अधिक-से-अधिक उजाड़ हो गयी है, विश्वासी सामान्यत: नकारात्मक और कमजोर हो गए हैं, उनकी श्रद्धा और प्रेम ठंडे पड़ चुके हैं।

मंगलवार, 29 मई 2018

भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है


"भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है"
सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "शैतान के समस्त कार्य और कर्म मनुष्य में व्यक्त होते हैं। अब मनुष्य के समस्त कार्य और कर्म शैतान की अभिव्यक्ति हैं और इसलिए परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं। मनुष्य शैतान का मूर्त रूप है, और मनुष्य का स्वभाव परमेश्वर के स्वभाव का प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ है। कुछ मनुष्य अच्छे चरित्र वाले होते हैं; परमेश्वर ऐसे व्यक्तियों के चरित्र के माध्यम से कुछ कार्य कर सकता है और जिस कार्य को वे करते हैं वह पवित्र आत्मा द्वारा निर्देशित होता है। फिर भी उनका स्वभाव परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ है। परमेश्वर जो कार्य उनमें करता है, वह केवल जो पहले से ही भीतर विद्यमान होता है उसी पर कार्य करता और उसे ही विस्तारित करता है। वे चाहे भविष्यद्वक्ता हों या परमेश्वर द्वारा अतीत के युगों से उपयोग में लाए गए व्यक्ति हों, कोई भी उसका प्रत्यक्षतः प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है।"

Hindi Christian Song | परमेश्वर से दिल की बात | Praise the Love of God

Hindi Christian Song | परमेश्वर से दिल की बात | Praise the Love of God हे ईश्वर! अपने दिल की बातें बताना चाहती हूँ तुम्हें। तुम्हा...