मंगलवार, 6 अगस्त 2019

सभी के द्वारा अपना कार्य करने के बारे में


सभी के द्वारा अपना कार्य करने के बारे में


वर्तमान धारा में, हर एक व्यक्ति जो सच में परमेश्वर से प्रेम करता है उसके पास परमेश्वर द्वारा उसे पूर्ण किए जाने का अवसर होता है। भले ही वे युवा हों या वृद्ध, जब तक वे अपने हृदय में परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और उसके लिए सम्मान रखते हैं, वे उसके द्वारा पूर्ण किए जाने के योग्य रहेंगे। परमेश्वर लोगों को उनके भिन्न भिन्न कार्यों के अनुसार पूर्ण करता है। जब तक तू अपने सामर्थ्य में सब कुछ करता है और अपने आपको परमेश्वर के कार्य हेतु समर्पित करते है तो तू उसके द्वारा पूर्ण किए जाने के योग्य रहेगा। वर्तमान समय में तुम लोगों में से कोई भी पूर्ण नहीं है।

शनिवार, 3 अगस्त 2019

बाइबल के विषय में (2)

बाइबल को पुराना नियम और नया नियम भी कहते हैं। क्या तुम लोग जानते हो कि "नियम" किसे संदर्भित करता है?

बाइबल के विषय में (2)


बाइबल को पुराना नियम और नया नियम भी कहते हैं। क्या तुम लोग जानते हो कि "नियम" किसे संदर्भित करता है? "पुराने नियम" में "नियम" इस्राएल के लोगों के साथ बांधी गई परमेश्वर की वाचा से आता है जब उसने मिस्रियों को मार डाला था और इस्राएलियों को फिरौन से बचाया था। हाँ वास्तव में, मेमने का लहू इस वाचा का प्रमाण था जिसे दरवाज़ों की चैखट के ऊपर पोता गया था, जिसके द्वारा परमेश्वर ने मनुष्य के साथ एक वाचा बांधी थी, एक ऐसी वाचा जिसमें कहा गया था कि वे सभी लोग जिनके दरवाज़ों के ऊपर और अगल बगल मेमने का लहू लगा हुआ हो वे इस्राएली हैं, वे परमेश्वर के चुने हुए लोग हैं, और उन सभी को परमेश्वर के द्वारा बख्श दिया जाएगा (क्योंकि यहोवा उस समय मिस्र के पहिलौठे पुत्रों और भेड़ों और पशुओं के पहिलौठों को मारने ही वाला था)।

बुधवार, 31 जुलाई 2019

क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का प्रेम, परमेश्वर में विश्वास, परमेश्वर की इच्छा


क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?


परमेश्वर पर विश्वास करने वाले व्यक्ति के रूप में, तुम को यह समझना चाहिए कि आज, इन अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य और अपने अंदर परमेश्वर की योजना के सारे कार्यों को ग्रहण करके, तुमने वास्तव में परमेश्वर के महान उत्कर्ष और उद्धार को पा लिया है। समस्त ब्रम्हांड में परमेश्वर के सारे कार्यों में इसी एक जनसमूह पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उसने अपने सभी प्रयास तुम लोगों के लिये समर्पित किये और तुम्हारे लिये सब कुछ बलिदान किया है, उसने समस्त ब्रम्हांड में पवित्र आत्मा के सभी कार्यों को वापस लेकर तुम्हें सौंप दिया है। यही कारण है कि मैं कहता हूं, तुम सभी सौभाग्यशाली हो। और यही नहीं, उसने अपनी महिमा इज़राइल से, अर्थात उसके चुने हुए लोगों सेहटाकर तुम लोगों को दी है, ताकि वह अपनी योजना के उद्देश्यों को तुम्‍हारे जनसमूह के द्वारा पूर्ण रूप से प्रकट कर सके।

सोमवार, 29 जुलाई 2019

अध्याय 10

आखिरकार, राज्य का युग बीते हुए समयों से अलग है। मनुष्य जो कुछ करता है यह उससे संबंधित नहीं है।


अध्याय 10


आखिरकार, राज्य का युग बीते हुए समयों से अलग है। मनुष्य जो कुछ करता है यह उससे संबंधित नहीं है। उसके बजाए, पृथ्वी पर उतरने के बाद मैं व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य करता हूँ-वह कार्य जिसका मनुष्य न तो अनुमान लगा सकते हैं और जिसे न ही पूरा कर सकते हैं। संसार की सृष्टि से लेकर आज तक, इन सारे वर्षों में यह हमेशा कलीसिया के निर्माण के विषय में था, किन्तु कोई भी राज्य के निर्माण के बारे में नहीं सुनता है। यद्यपि मैं अपने मुँह से इसके विषय में बात करता हूँ, फिर भी क्या कोई है जो उसके सार तत्व को जानता है? मैं एक बार मनुष्यों के संसार में उतरा था और उनके दुख दर्द का अवलोकन और अनुभव किया था, किन्तु मैंने अपने देहधारण के उद्देश्य को पूरा नहीं किया था।

शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है

परमेश्वर भिन्न-भिन्न युगों के अनुसार अपने वचन कहता है और अपना कार्य करता है, तथा भिन्न-भिन्न युगों में, वह भिन्न-भिन्न वचन कहता है।

परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है

परमेश्वर भिन्न-भिन्न युगों के अनुसार अपने वचन कहता है और अपना कार्य करता है, तथा भिन्न-भिन्न युगों में, वह भिन्न-भिन्न वचन कहता है। परमेश्वर नियमों से नहीं बँधता है, और एक ही कार्य को दोहराता नहीं है, और न अतीत की बातों को लेकर विषाद करता है; वह ऐसा परमेश्वर है जो सदैव नया है, कभी पुराना नहीं होता है, और वह हर दिन नये वचन बोलता है। जिस चीज का आज पालन किया जाना चाहिए उसका तुम्हें पालन करना चाहिए; यही मनुष्य की जिम्मेवारी और कर्तव्य है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि अभ्यास परमेश्वर की वर्तमान रोशनी और वास्तविक वचनों के आस-पास केन्द्रित हो। परमेश्वर नियमों का पालन नहीं करता है, और अपनी बुद्धि और सर्व-सामर्थ्य को प्रकट करने के लिए विभिन्न परिप्रेक्ष्यों से बोलने में सक्षम है।

सोमवार, 22 जुलाई 2019

तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई

6000 वर्षों के दौरान कार्य की समग्रता समय के साथ धीरे-धीरे बदल गई है। इस कार्य में बदलाव समस्त संसार की परिस्थितियों के अनुसार हुए हैं।


तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई


6000 वर्षों के दौरान कार्य की समग्रता समय के साथ धीरे-धीरे बदल गई है। इस कार्य में बदलाव समस्त संसार की परिस्थितियों के अनुसार हुए हैं। परमेश्वर का प्रबंधन का कार्य केवल मानवजाति के पूर्णरूपेण विकास की प्रवृत्ति के अनुसार धीरे-धीरे रूपान्तरित हुआ है; सृष्टि के आरंभ में इसकी पहले से योजना नहीं बनाई गई थी। संसार का सृजन करने से पहले, या इसके सृजन के ठीक बाद, यहोवा ने अभी तक कार्य के प्रथम चरण, व्यवस्था की; कार्य के दूसरे चरण—अनुग्रह की; और कार्य के तीसरे चरण—जीतने की योजना नहीं बनायी थी, जिनमें वह सबसे पहले लोगों के एक समूह—मोआब के कुछ वंशजों के बीच कार्य करता, और इसके माध्यम से वह समस्त ब्रह्माण्ड को जीतता।

शनिवार, 20 जुलाई 2019

देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर

बहुत वर्षों से जैसे-जैसे परमेश्वर का आत्मा पृथ्वी पर कार्य करता जा रहा है वह निरंतर खोजता आ रहा है।


देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर


बहुत वर्षों से जैसे-जैसे परमेश्वर का आत्मा पृथ्वी पर कार्य करता जा रहा है वह निरंतर खोजता आ रहा है। युगों भर में परमेश्वर ने अपने कार्य को करने के लिए बहुत से लोगों का उपयोग किया है। फिर भी, परमेश्वर के आत्मा के पास आराम के लिए अभी भी कोई उपयुक्त स्थान नहीं है। इसलिए परमेश्वर भिन्न-भिन्न लोगों के बीच निरंतर इधर-उधर घूमते हुए अपना कार्य करता है, और कुल मिला कर वह इसे करने के लिए लोगों का उपयोग करता है। अर्थात्, इन सभी वर्षों में, परमेश्वर का कार्य कभी नहीं रुका है, बल्कि पूरी तरह से आज के दिन तक भी यह लगातार मनुष्य में आगे बढ़ाया जा रहा है।

मंगलवार, 16 जुलाई 2019

देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं


देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं


परमेश्वर के द्वारा किए गए कार्य के प्रत्येक चरण का एक वास्तविक महत्व है। जब यीशु का आगमन हुआ, वह पुरुष था, और इस बार वह स्त्री है। इससे, तुम देख सकते हो कि परमेश्वर ने अपने कार्य के लिए पुरुष और स्त्री दोनों का सृजन किया और वह लिंग के बारे में कोई भी भेदभाव नहीं करता है। जब उसका आत्मा आगमन करता है, तो वह इच्छानुसार किसी भी देह को धारण कर सकता है और वह देह उसका ही प्रतिनिधित्व करती है। चाहे यह पुरुष हो या स्त्री, दोनों ही परमेश्वर को प्रकट करते हैं क्योंकि यह उसका देहधारी शरीर है।

शनिवार, 13 जुलाई 2019

क्या तुम जानते हो परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है


क्या तुम जानते हो परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है


पुराना युग बीत चुका है, और नया युग आ गया है। वर्ष दर वर्ष, और दिनोंदिन परमेश्वर ने बहुत काम किया है। वह इस संसार में आया और फिर लौट गया। ऐसा चक्र अनेक पीढ़ियों तक लगातार चलता रहा। आज भी परमेश्वर को जो काम करना है वह उसी प्रकार काम करता है वह काम जिसे उसे अभी पूरा करना है, उसने आज तक विश्राम में प्रवेश नहीं किया है। सृष्टि के समय से लेकर आज तक परमेश्वर ने बहुत से काम किये हैं, परंतु क्या तुम जानते हो कि परमेश्वर आज जो काम करता है वह पहले से अधिक बड़ा है, और उसका स्वरूप भी बड़ा है?

गुरुवार, 11 जुलाई 2019

पतरस ने यीशु को कैसे जाना

उस समय के दौरान जो पतरस ने यीशु के साथ बिताया, उसने यीशु में अनेक प्यारे अभिलक्षणों, अनेक अनुकरणीय पहलुओं, और अनेक ऐसी चीजों को देखा जिन्होंने उसे आपूर्ति की।


पतरस ने यीशु को कैसे जाना


उस समय के दौरान जो पतरस ने यीशु के साथ बिताया, उसने यीशु में अनेक प्यारे अभिलक्षणों, अनेक अनुकरणीय पहलुओं, और अनेक ऐसी चीजों को देखा जिन्होंने उसे आपूर्ति की। यद्यपि पतरस ने कई तरीकों से यीशु में परमेश्वर के अस्तित्व को देखा, और कई प्यारे गुण देखे, किन्तु पहले वह यीशु को नहीं जानता था। पतरस जब 20 वर्ष का था तब उसने यीशु का अनुसरण करना आरम्भ किया, और छः वर्ष तक वह ऐसा करता रहा। उस समय के दौरान, उसे यीशु के बारे में कभी भी पता नहीं चला, किन्तु वह केवल उसके प्रति आदर और प्रशंसा के भाव के कारण उसका अनुसरण करने को तैयार रहता था।

Hindi Christian Song | परमेश्वर से दिल की बात | Praise the Love of God

Hindi Christian Song | परमेश्वर से दिल की बात | Praise the Love of God हे ईश्वर! अपने दिल की बातें बताना चाहती हूँ तुम्हें। तुम्हा...