"स्वर्गिक राज्य का मेरा स्वप्न" (3) - स्वर्ग का राज्य वास्तव में कहां है?
प्रभु में विश्वास करने वाले हम सबकी सबसे बड़ी इच्छा प्रभु के लौटने का स्वागत करने, स्वर्ग के राज्य में लाये जाने, और परमेश्वर के वचन और आशीष ग्रहण करने की होती है। अधिकतर लोग मानते हैं कि प्रभु के लौटने पर, प्रभु से मिलने के लिए हम आकाश में उठा लिये जायेंगे। परंतु बाइबल में कहा गया है कि नया यरुशलेम स्वर्ग से नीचे आयेगा। “परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है,” “जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया।” स्वर्ग का राज्य आकाश में है या पृथ्वी पर? अपने लौटने पर प्रभु संतों को स्वर्ग के राज्य में कैसे ले जायेंगे?
Welcome the second coming of the Lord Jesus | Hindi Christian Movie | "स्वर्गिक राज्य का मेरा स्वप्न" (Hindi Dubbed)
जैसे ही कोई दक्षिण कोरियाई पादरी प्रभु के आगमन की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा कर रहा होता है, तो उसे चमकती पूर्वी बिजली के बारे में पता चलता है जो चीन में प्रकट हुई है, जो यह गवाही देती है कि प्रभु पहले ही लौट चुका है। वह सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करने के लिए चीन जाता है। कई असफलताओं के बाद वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने में समर्थ होता है, लेकिन जैसे ही वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के माध्यम से प्रभु की आवाज़ को पहचाता है, तो अचानक ही उसे सीसीपी सरकार द्वारा गिरफ़्तार करके कोरिया निर्वासित कर दिया जाता है।
Judgement in the Last Days | Hindi Christian Movie "शहर परास्त किया जाएगा" | Second Coming of Jesus
ईसाई चेंग ह्युआइज़ चीन की एक गृह-कलीसिया में सहकर्मी हैं। वे अपनी कलीसिया को एक कारखाना खोलते हुए देखती हैं जिसमें पादरी विश्वासियों को सीसीपी सरकार को सौंपने के लिए थ्री-सेल्फ-कलीसिया में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं। चर्च के पादरी और एल्डर्स गोपनीय और ख़ुलेआम तरीकों से अपने व्यक्तिगत ओहदों और नाम के लिए ईर्ष्यापूर्ण ढंग से संघर्ष करते हैं और कलीसिया को विभाजित कर देते हैं। चमकती पूर्वी बिजली का विरोध करने के लिए और विश्वासियों को उसका अध्ययन करने से रोकने के लिए वे सीसीपी सरकार के साथ भी गठजोड़ कर लेते हैं।
Hindi Christian Video clip "बेड़ियों को तोड़ो और भागो"(4) - धार्मिक फरीसियों के बंधन से मुक्ति पाओ और परमेश्वर की ओर लौट आओ
पूरे धार्मिक समुदाय में, पादरियों को बाइबल के आगे और पीछे की जानकारी है और वे अक्सर लोगों को बाइबल के अंशों की व्याख्या करते हैं हमारी नज़रों से, ऐसा प्रतीत होता है कि वे परमेश्वर को पूरी तरह जानते हैं, लेकिन धार्मिक संसार में बहुत सारे ऐसे लोग क्यों हैं जो देहधारी परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की निंदा और विरोध करते हैं? सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं "वे जो बड़ी-बड़ी कलीसियाओं में बाइबिल पढ़ते हैं, वे हर दिन बाइबिल पढ़ते हैं, फिर भी उनमें से एक भी परमेश्वर के काम के उद्देश्य को नहीं समझता है। एक भी परमेश्वर को नहीं जान पाता है; और यही नहीं, उनमें से एक भी परमेश्वर के हृदय के अनुरूप नहीं है। वे सबके सब व्यर्थ, अधम लोग हैं, जिनमें से प्रत्येक परमेश्वर को सिखाने के लिए ऊँचे पर खड़ा हैं। यद्यपि वे परमेश्वर के नाम पर धमकी देते हैं, किंतु वे जानबूझ कर उसका विरोध करते हैं।"
Hindi Gospel Movie clip "बाइबल और परमेश्वर" (4) - परमेश्वर और बाइबल के बीच क्या संबंध है?
दो हजार वर्षों तक, हमने बाइबल के अनुसार प्रभु में विश्वास किया है, और हम में से अधिकांश मानते हैं “बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, परमेश्वर में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है, बाइबल में विश्वास करना परमेश्वर में विश्वास करना है।” क्या ये सभी विचार सही हैं? वास्तव में प्रभु में विश्वास करने का क्या अर्थ है? बाइबल और परमेश्वर के बीच क्या संबंध है? क्या बाइबल में अंध विश्वास रखने और आराधना करने का मतलब परमेश्वर में विश्वास करना और उनकी पूजा करना है? यह वीडियो आपको इसका उत्तर देगी!
Hindi Gospel Movie clip "बाइबल और परमेश्वर"(5) - मसीह जीवन का स्रोत है और साथ ही साथ बाइबल का प्रभु भी है
बाइबल परमेश्वर के वचनों के साथ-साथ मनुष्य के अनुभवों और साक्ष्यों से परिपूर्ण है जो हमें जीवन प्रदान कर सकती है और हमारे लिए अत्यंत लाभदायक है। प्रभु यीशु ने कहा, “मैं ही पुनरुज्जीवन, और जीवन हूँ: जो कोई भी मुझमें विश्वास करता है, चाहे उसकी मृत्यु क्यों न हो जाएं, वह जीवित रहेगा। और जो कोई भी मुझमें जीता और विश्वास करता है, वह कभी नहीं मरता है।” (यूहन्ना 11:25-26) . परन्तु 2,000 वर्ष बीत जाने के बाद भी, प्रभु में विश्वास रखने वाले जिन लोगों ने बाइबल को पढ़ा था, अभी तक शाश्वत जीवन को प्राप्त क्यों नहीं कर सके। क्या इसका कारण यह हो सकता था कि बाइबल शाश्वत जीवन प्राप्त करने का मार्ग नहीं है? क्या इसका कारण यह हो सकता है कि जब प्रभु यीशु ने छुटकारा देने का कार्य किया तो उन्होंने मानव-जाति को शाश्वत जीवन का वरदान नहीं दिया? शाश्वत जीवन प्राप्त करने के लिए हमें आखिर क्या करना चाहिए?
Hindi Christian Movie | Unveiling Mysteries of the Bible | "बदलाव की घड़ी"
सू मिंग्यू मुख्य-भूमि चीन में एक गृह कलीसिया में उपदेशिका हैं। वर्षों से वे प्रभु की धर्मनिष्ठ सेविका रही हैं, जो प्रभु के लिए उपदेश देने का कार्य करती हैं और कलीसिया के कार्य का भार उठाने पर ज़ोर देती हैं। वे बाइबल में पौलुस के कथन पर चलती हैं, यह समझते हुए कि केवल प्रभु में विश्वास कर लेने मात्र से धार्मिक कहलाया जा सकता है और अनुग्रह द्वारा रक्षा मिल सकती है। हालांकि मनुष्य अब भी निरंतर पाप करता है, परंतु उसके पाप प्रभु द्वारा क्षमा किये जा चुके हैं, और प्रभु के लौटने पर उसकी छवि उसी पल बदल कर पवित्र कर दी जायेगी उसे स्वर्ग के राज्य में आरोहित कर लिया जाएगा। परंतु, हाल के वर्षों में कलीसिया अधिक-से-अधिक उजाड़ हो गयी है, विश्वासी सामान्यत: नकारात्मक और कमजोर हो गए हैं, उनकी श्रद्धा और प्रेम ठंडे पड़ चुके हैं। कुछ सह-कार्यकर्ता प्रभु के वचन पर चलते हैं: “जो मुझ से, ‘हे प्रभु! हे प्रभु !’ कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है।” वे इस धारणा पर प्रश्न करते हैं कि “जब प्रभु लौटेंगे, तो वे उसी पल मनुष्य की छवि बदल देंगे और उसे स्वर्ग के राज्य में आरोहित कर लेंगे।” वे समझते हैं कि चूंकि हम अब भी निरंतर पाप करते हैं, पवित्रता पाने में बहुत अधिक असफल हैं, और परमेश्वर की इच्छा की अवज्ञा करते हैं, तो प्रभु के आने पर हमें स्वर्ग के राज्य में कैसे आरोहित किया जाएगा? चर्चा और वाद-विवाद के बाद, सू मिंग्यू समझती हैं कि प्रभु के वचन और प्रभु के आने पर उसी पल मनुष्य की छवि बदल देने के पौलुस के विचार में थोड़े विरोधाभास हैं। आखिर कौन-सा विचार सही है? सु मिज्ञू हृदय से दुविधा और उलझन में हैं। अपनी व्यावहारिक उलझन को सुलझाने के लिए, ताकि प्रभु उन्हें त्याग न दें, पवित्र आत्मा के कार्य वाली कलीसिया को ढूँढने के क्रम में, सू मिंग्यू चमकती पूर्वी बिजली का अध्ययन करने का फैसला करती हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के उपदेशकों के साथ चर्चा और वाद-विवाद करके, सू मिंग्यू और दूसरे लोग अंतत: स्वर्ग के राज्य में प्रवेश के एकमात्र मार्ग को समझ पाते हैं ...
चमकती पूर्वी बिजली, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का सृजन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकट होने और उनका काम, परमेश्वर यीशु के दूसरे आगमन, अंतिम दिनों के मसीह की वजह से किया गया था। यह उन सभी लोगों से बना है जो अंतिम दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और उसके वचनों के द्वारा जीते और बचाए जाते हैं। यह पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था और चरवाहे के रूप में उन्हीं के द्वारा नेतृत्व किया जाता है। इसे निश्चित रूप से किसी मानव द्वारा नहीं बनाया गया था। मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है। परमेश्वर की भेड़ परमेश्वर की आवाज़ सुनती है। जब तक आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, आप देखेंगे कि परमेश्वर प्रकट हो गए हैं।
Hindi Christian Video | The Lord Jesus Christ Is My Salvation | "बेड़ियों को तोड़ो और भागो"
Lee Chungmin was an elder at a church in Seoul, South Korea. For more than twenty years, he enthusiastically served the Lord, fully concentrated on studying the Bible. Following the example of his religious leaders, he thought that believing in the Lord meant believing in the Bible, and that having faith in the Bible was exactly the same as having faith in the Lord. He believed that so long as he adhered to the Bible, he would be raptured into the kingdom of heaven. These conceptions constrained him like a pair of shackles, restraining him from following God's footsteps and believing in God. As a result, Lee Chungmin never thought to look into Almighty God's work of the last days …
Hindi Gospel Movie "प्रतीक्षारत" | Hear the Voice of God and Welcome the Lord
यांग हूएन चीन में एक हाउस चर्च के एक पादरी हैं। अपने पिता यांग शोडाऊ के साथ, उन्होंने प्रभु यीशु के बादलों से उतर कर आने और उन्हें स्वर्ग के साम्राज्य में ले जाए जाने की प्रतीक्षा की है। इसके लिए, उन्होंने बड़ी मेहनत से प्रभु के लिए कार्य किया है, उसके नाम का दामन थामा है, और यह विश्वास किया है कि जो कोई भी बादलों से उतरकर न आने वाला प्रभु यीशु है, वह झूठा मसीह है। इसलिए, जब उन्होंने प्रभु के दूसरे अवतरण के बारे में सुना, तो उन्होंने न उसपर ध्यान दिया और न ही उसे स्वीकार किया। उन्होंने सोचा कि देखना और प्रतीक्षा करना ही सबसे अच्छा रहेगा। .... जब वे निष्क्रिय होकर प्रतीक्षा कर रहे थे. तो यांग हूएन की चचेरी बहन ली जियायिन ने अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लिया, और उन तक सुसमाचार का प्रसार किया।
"प्रभुत्व का रहस्य" (4) - केवल देहधारी परमेश्वर अंत के दिनों में न्याय का कार्य कर सकते हैं
चमकती पूर्वी बिजली यह गवाही देती है कि परमेश्वर ने स्वयं न्याय का कार्य करने के लिए अंत के दिनों में देहधारण किया है। और फिर भी व्यवस्था के युग में परमेश्वर का कार्य मूसा का इस्तेमाल करके किया गया था। तो क्या अंत के दिनों में परमेश्वर का काम उसी तरीके से, मनुष्य का इस्तेमाल करके नहीं किया जा सकता? परमेश्वर को देहधारण करने और अपना कार्य स्वयं करने की आवश्यकता क्यों होती है? सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन"न्याय का कार्य परमेश्वर का स्वयं का कार्य है, इसलिए स्वभाविक तौर पर इसे परमेश्वर के द्वारा ही अवश्य किया जाना चाहिए; उसकी जगह इसे मनुष्य द्वारा नहीं किया जा सकता है। क्योंकि सत्य के माध्यम से मनुष्य को जीतना न्याय है, इसलिए यह निर्विवाद है कि तब भी परमेश्वर मनुष्यों के मध्य अपना कार्य करने के लिए देहधारी छवि के रूप में प्रकट होता है।"
The Kingdom of God | Hindi Christian Video "स्वर्गिक राज्य का मेरा स्वप्न" | Gospel of the Kingdom
सॉन्ग येमयोंग दक्षिण कोरिया की एक कलीसिया के पादरी हैं। अनेक वर्षों तक प्रभु के एक धर्मनिष्ठ अनुयायी के रूप में, वे प्रभु के लौटने पर स्वर्ग के राज्य में आरोहण की प्रतीक्षा करते हुए पूरे मन से अपने विश्वास का अनुसरण और प्रभु के लिए कार्य कर रहे हैं। हाल के वर्षों में, कलीसिया में पवित्र आत्मा के कार्य की अनुपस्थिति और उसके उत्तोरत्तर उजाड़ होने को देख कर वे बहुत परेशान और लाचार अनुभव करते रहे हैं। उस समय उन्होंने चीन में उभरते, चमकती पूर्वी बिजली नामक एक संप्रदाय के बारे में सुना, जो सत्य व्यक्त कर अंत के दिनों में न्याय कार्य कर रहे सर्वशक्तिमान परमेश्वर - प्रभु यीशु के लौटने की गवाही देता है। इस प्रकार, सॉन्ग येमयोंग और उपदेशक चॉय शेंजेन, चमकती पूर्वी बिजली का अध्ययन करने हेतु चीन की यात्रा पर गये, जहां उन्होंने अंतत: सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ा, और पाया कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सभी वचन सत्य हैं, परमेश्वर की वाणी हैं! सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही संभवत: वापस लौटे हुए प्रभु यीशु हैं! फिर भी, जब वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य का अध्ययन कर रहे थे, धार्मिक एल्डर्स ने उनके साथ गद्दारी कर पुलिस को मुखबिरी कर दी। उन दोनों को चीन की साम्यवादी पुलिस ने गिरफ्तार कर निर्वासित कर दिया। दक्षिण कोरिया लौट कर, सॉन्ग येमयोंग विशेष रूप से दुखी और खोये हुए थे। वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया से संपर्क साधने के तरीके सोचने लगे।
"प्रभुत्व का रहस्य" (6) - देहधारण के माध्यम से परमेश्वर के लिए उनका कार्य करने की आवश्यकता
ऐसा क्यों कहा गया है कि यह परमेश्वर के लिए भ्रष्ट मानवजाति को बचाना देहधारण से अधिक फायदेमंद है? परमेश्वर के देहधारण की आवश्यकता और प्रमुख महत्व को कैसे देखा जा सकता है? समझें?सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन"मनुष्य की देह को शैतान के द्वारा भष्ट किया गया है, और बिलकुल अन्धा कर दिया गया है, और गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया गया है। परमेश्वर किस लिए व्यक्तिगत रूप से देह में कार्य करता है उसका अत्यंत मौलिक कारण है क्योंकि उसके उद्धार का विषय है मनुष्य, जो देह से है, और क्योंकि शैतान भी परमेश्वर के कार्य को बिगाड़ने के लिए मनुष्य की देह का उपयोग करता है। शैतान के साथ युद्ध वास्तव में मनुष्य पर विजय पाने का कार्य है, और ठीक उसी समय, मनुष्य भी परमेश्वर के उद्धार का विषय है। इस रीति से, देहधारी परमेश्वर का कार्य परम आवश्यक है। शैतान ने मनुष्य की देह को भ्रष्ट कर दिया है, और मनुष्य शैतान का मूर्त रूप बन गया है, और ऐसा विषय बन गया है जिसे परमेश्वर के द्वारा हराया जाना है। इस रीति से, शैतान से युद्ध करने और मनुष्य को बचाने का कार्य पृथ्वी पर घटित होता है, और शैतान से युद्ध करने के लिए परमेश्वर को अवश्य मनुष्य बनना होगा। यह अत्यंत व्यावहारिकता का कार्य है।"
आओ नूह के युग के दौरान की मानवता पर पीछे मुड़कर देखते हैं। मनुष्य सभी प्रकार की दुष्ट गतिविधियों में संलग्न था और पश्चाताप करने के लिए उसने विचार भी नहीं किया। किसी ने भी परमेश्वर के वचन को नहीं सुना। उनकी कठोरता तथा बुराई ने परमेश्वर के क्रोध को बढ़ाया और अंत में, वे एक भयंकर बाढ़ की आपदा द्वारा निगल लिये गये। केवल नूह तथा उसके आठ लोगों के परिवार ने परमेश्वर के वचन को सुना और बच पाने में सफल रहे। अब, अंत के दिन पहले ही आ चुके हैं। मानवता का भ्रष्टाचार और ज्यादा गहरा होता जा रहा है। हर कोई दुष्टता की पूजा कर रहा है। सम्पूर्ण धार्मिक जगत, संसार की धारा का अनुसरण कर रहा है। वे सत्य से थोड़ा सा भी प्रेम नहीं करते। नूह के दिन पहले से ही आ चुके हैं! मानवता को बचाने के लिए, मानवता के बीच अंत के दिनों के न्याय के कार्य करने के लिए, परमेश्वर एक बार फिर वापस आ गये हैं। यह आखिरी बार है जब परमेश्वर मनुष्य को बचायेंगे! मानवता को क्या चुनना चाहिए? यह एक सच्ची कहानी है। चूंकि, सिचुआन प्रांत में किंगपिंग जिले के नागरिकों ने बार-बार सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार को स्वीकार करने से मना कर दिया है, इसलिए उन्हें आपदा के दो उदाहरणों को झेलना पड़ा है।
बहुत से लोगों का मानना है कि परमेश्वर में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है, और प्रभु के लिए कष्ट उठाकर कार्य करना परमेश्वर में विश्वास करने की वास्तविकता है। इस धार्मिक संसार में कोई भी अच्छे प्रकार से यह नहीं समझ पाया कि परमेश्वर में सच्चा विश्वास रखने का अर्थ क्या है। "परमेश्वर पर विश्वास" का अर्थ, यह विश्वास करना है कि परमेश्वर है; यह परमेश्वर पर विश्वास की सरलतम अवधारणा है। इससे बढ़कर यह बात है कि परमेश्वर है, यह मानना परमेश्वर पर सचमुच विश्वास करना नहीं है; बल्कि यह मजबूत धार्मिक प्रभाव के साथ एक प्रकार का सरल विश्वास है। परमेश्वर पर सच्चे विश्वास का अर्थ इस विश्वास के आधार पर परमेश्वर के वचनों और कामों का अनुभव करना है कि परमेश्वर सब वस्तुओं पर संप्रभुता रखता है। इस तरह से तुम अपने भ्रष्ट स्वभाव से मुक्त हो जाओगे, परमेश्वर की इच्छा को पूरा करोगे और परमेश्वर को जान जाओगे। केवल इस प्रकार की यात्रा के माध्यम से ही तुम्हें परमेश्वर पर विश्वास करने वाला कहा जा सकता है। ""वचन देह में प्रकट होता है" से
फू जिंहुआ चीन के एक गृह कलीसिया की एक वरिष्ठ सदस्य थी। अनेक ईसाईयों के समान, उसने उत्साहपूर्वक स्वयं को परमेश्वर को समर्पित कर दिया था, और उसके लिए उसने कड़ी मेहनत की थी। वह विशेष रूप से आत्मविश्वास से भरपूर थी, और स्वयं को ऐसे व्यक्ति के रूप में समझती थी जो वास्तव में प्रभु से प्रेम करता था। अनेक वर्षों तक प्रभु का अनुसरण करने के उपरांत, वह सम्पूर्ण हृदय से मानने लगी थी कि बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है और बाइबल में वर्णित सभी वचन परमेश्वर के वचन हैं। इसलिए, अपने मन में, वो बाइबल में विश्वास करने को प्रभु में विश्वास करना समझती थी। उसने सोचा कि जो लोग बाइबल द्वारा बताये गये मार्ग से विमुख हो चुके हैं, उन्हें प्रभु का अनुयायी नहीं कहा जा सकता था। वह यह भी मानती थी कि जब प्रभु बादलों के साथ उतरेंगे, तब स्वर्ग के राज्य में स्वर्गाराहित होने के लिए उसे सिर्फ बाइबल पर अवलंबित रहना चाहिए। इसलिए जब लोगों के एक समूह ने अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्यों के बारे में गवाही देना शुरू किया, तब फू जिंहुआ धार्मिक पादरियों और एल्डर्स (गुरूजनों) की गलत धारणाओं में विश्वास रखती थी, और इससे अधिक उसने कभी भी इन बातों की जांच करने का प्रयास नहीं किया। एक दिन, फू जिंहुआ कलीसिया के एक साथी सदस्य, बहन ही से मिलने गयी। बहन ही ने अपनी स्वयं की उलझन के बारे में उससे बात की: "प्रभु की वापसी के बारे में सभी भविष्यवाणियां मूल रूप से पूरी हुईं हैं, और प्रभु का पुनरागमन हो चुका होना चाहिए।
Hindi Gospel Movie | What Is True Faith in God? | "परमेश्वर में आस्था" | The Second Coming of Jesus
यू कोंगगुआंग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के लिए सुसमाचार देता है। सुसमाचार देते समय चीन की साम्यवादी सरकार उसके पीछे लगी रहती थी। वह पहाड़ों में भाग गया, जहाँ उसे स्थानीय गृह कलीसिया के एक सहकर्मी, झेंग सुन से मदद मिली। जब वे पहली बार एक दूसरे से मिले, उन्हें ऐसा लगा कि वे पहले ही बहुत समय से एक दूसरे को जानते हैं। झेंग सुन, यू कोंगगुआंग को एक फूस की झोपड़ी में ले गए जहाँ वह और उनके सह-कर्मी इकट्ठे हुए। वहाँ झेंग सुन और उसके सह-कर्मियों के बीच इस बात पर चर्चा शुरू हुई कि क्या परमेश्वर में विश्वास करने वालों को सत्ता के लोगों की आज्ञा माननी चाहिए या नहीं। यू कोंगगुआंग ने इस मुद्दे के प्रकाश में सहभागिता करी और उनके भ्रम को दूर कर दिया।
लियू झिझोंग चीन में एक स्थानीय कलीसिया के एल्डर हैं। वह 30 वर्षों से भी अधिक समय से एक विश्वासी रहे हैं, और उन्होंने निरंतर विश्वास किया है कि "बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है," "बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करती है, परमेश्वर में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है, बाइबलमें विश्वास करना परमेश्वर में विश्वास करना है।" उनके हृदय में बाइबल सर्वोपरि है। बाइबिल में अपनी गहरी श्रद्धा और अटूट विश्वास के कारण, उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंतिम दिनों के कार्य को देखने या समझने की मांग नहीं की है। एक दिन, जब उन्होंने विश्वासियों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को ऑनलाइन पढ़ने से रोक दिया, तो उनका सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के उपदेशकों के साथ आमना-सामना हो गया। सत्य के बारे में गंभीर बहस के बाद, क्या वह अंततः बाइबल और परमेश्वर के बीच के रिश्ते को स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम थे? क्या वह बाइबल से हटकर यह समझने में सक्षम थे कि यीशु ही सत्य, मार्ग और जीवन है? क्या वह परमेश्वर के सामने स्वर्गारोहण किए जाएंगे?
अधिकांश विश्वासियों का मानना है कि यदि हम प्रभु का नाम लेते हैं, प्रार्थना करते है, बाइबल पढ़ते हैं और बैठकों में जाते हैं, और यदि हम वस्तुओं का त्याग करते हैं, प्रभु के लिए खर्च और कष्ट उठाकर कार्य करते हैं, तो यह प्रभु में सच्चा विश्वास है, और जब प्रभु लौटेंगे तब हम स्वर्ग के राज्य में आरोहित किए जाने में सक्षम होंगे। क्या इस प्रकार का विचार सही है? प्रभु यीशु ने कहा, “उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, हे प्रभु, हे प्रभु क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्चर्यकर्म नहीं किए? तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, ‘मैंने तुम को कभी नहीं जाना : हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ।'” (मत्ती 7: 22-23)