कैनान की धरती पर खुशियाँ
मैं ईश्वर के परिवार में लौट आया, जोश और खुशियों से भरकर।
नाज़ है सच्चे प्रभु जाना तुझे, दिल अपना मैंने किया तुझे अर्पण।
आंसुओ की घाटी से गुज़रा मगर, देखा है मैंने प्रेम प्रभु का।
दिन-ब दिन बढ़ता प्रभु में प्रेम मेरा, है प्रभु मेरी खुशियों का खज़ाना।
उसकी सुंदरता पे मोहित मेरा दिल, खो गया है बस प्रभु के प्रेम में।
कितना भी चाहूँ प्रेम पूरा ना होगा, प्रभु महिमा के गीत दिल में मेरे।
उसकी सुंदरता पे मोहित मेरा दिल, खो गया है बस प्रभु के प्रेम में।
कितना भी चाहूँ प्रेम पूरा ना होगा, प्रभु महिमा के गीत दिल में मेरे।