शुक्रवार, 1 मार्च 2019

अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव" (उद्धरण, मंच संस्करण)


      सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं "उसके हाथों में गर्मजोशी है और वे बलवान हैं, उसके कदम हल्के हैं, उसकी आवाज़ कोमल और अनुग्रहकारी है; उसका स्वरूप हमारे पास से होकर गुज़र जाता है और मुड़ जाता है, और समूची मानवजाति का आलिंगन करता है; उसका मुख सुन्दर और सौम्य है। वह छोड़कर कभी नहीं गया, और न ही वा गायब हुआ है। सुबह से लेकर शाम तक, वह मानवजाति के निरन्तर साथी है। मानवता के लिए उनकी समर्पित देखभाल और विशेष स्नेह, साथ ही साथ मनुष्य के लिए उनकी सच्ची चिंता और प्रेम, को थोड़ा थोड़ा करके प्रदर्शित किया गया जब उन्होंने नीनवे के नगर को बचाया था।
विशेष रूप से, यहोवा परमेश्वर और योना के बीच के संवाद ने मानवजाति के लिए सृष्टिकर्ता की दया को खुलकर प्रकट किया जिसे उन्होंने स्वयं सृजा था। इन वचनों के माध्यम से, तुम मानवता के प्रति परमेश्वर की सच्ची भावनाओं की एक गहरी समझ हासिल कर सकते हो।...... केवल सृष्टिकर्ता ने ही इस मानवजाति के ऊपर दया की है। केवल सृष्टिकर्ता ने ही इस मानवजाति को कोमलता और स्नेह दिखाया है। केवल सृष्टिकर्ता ही इस मानवजाति के लिए सच्चा और कभी न टूटनेवाला प्रेम रखता है। उसी प्रकार, केवल सृष्टिकर्ता ही इस मानवजाति पर दया कर सकता है और अपनी सम्पूर्ण सृष्टि का पालन पोषण कर सकता है। उसका हृदय मनुष्य के हर एक कार्यों से खुशी से उछलता और दुखित होता है: वह मनुष्य की दुष्टता और भ्रष्टता के ऊपर क्रोधित, परेशान और दुखित होता है; वह मनुष्य के पश्चाताप और विश्वास के लिए प्रसन्न, आनंदित, क्षमाशील और प्रफुल्लित होता है; उसका हर एक विचार और उपाय मानवजाति के लिए अस्तित्व में बने हुए हैं और उसके चारों और परिक्रमा करते हैं; जो वह है और जो उसके पास है उसे पूरी तरह से मानवजाति के वास्ते प्रकट किया जाता है; उसकी भावनाओं की सम्पूर्णता मानवजाति के अस्तित्व के साथ आपस में गुथी हुई है। मनुष्य के वास्ते, वह भ्रमण करता है और यहां वहां भागता है, वह खामोशी से अपने जीवन का हर अंश दे देता है; वह अपने जीवन का हर मिनट और सेकेंड समर्पित कर देता है। उसने कभी नहीं जाना कि स्वयं अपने जीवन पर किस प्रकार दया करना है, फिर भी उसने हमेशा से मानवजाति पर दया की है और उसका पालन पोषण किया है जिसे उसने स्वयं सृजा था। वह सब कुछ देता है जिसे उसे इस मानवजाति को देना है। वह बिना किसी शर्त के और बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के अपनी दया और सहनशीलता प्रदान करता है। वह ऐसा सिर्फ इसलिए करता है जिससे मानवजाति उसकी नज़रों के सामने निरन्तर जीवित रहे, और जीवन के उसके प्रावधान प्राप्त करती रहे; वह ऐसा सिर्फ इसलिए करता है जिससे मानवजाति एक दिन उसके सम्मुख समर्पित हो जाए और यह पहचान जाए कि यह वही ईश्वर हैं जो मुनष्य के अस्तित्व का पालन पोषण करता है और समूची सृष्टि के जीवन की आपूर्ति करता है।"

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